अगर आप सब्जी की खेती से अच्छा मुनाफा कमाना चाहते हैं, तो फरवरी-मार्च का समय तोरई की खेती के लिए सबसे उत्तम माना जाता है। यह फसल कम लागत में अधिक उत्पादन देती है और बाजार में इसकी मांग हमेशा बनी रहती है। कई किसान अब पारंपरिक फसलों से हटकर तोरई जैसी सब्जियों की खेती कर रहे हैं और इससे शानदार मुनाफा कमा रहे हैं। इसके सही समय पर उचित देखभाल और सही किस्म के चुनाव से किसान अपनी आमदनी को कई गुना बढ़ा सकते हैं।
तोरई की खेती साल में तीन बार की जा सकती है, जिससे किसान अधिक मुनाफा कमा सकते हैं। गर्मी के मौसम में फरवरी-मार्च के बीच तोरई की बुवाई सबसे लाभदायक होती है। बरसात के मौसम में जून-जुलाई और सर्दियों में अक्टूबर-नवंबर में भी इसकी खेती की जा सकती है।
तोरई की खेती के लिए अच्छी जल निकासी वाली मिट्टी जरूरी होती है, जिससे खेत में पानी अधिक समय तक न रुके और पौधों को सही मात्रा में नमी मिल सके। मिट्टी की जल धारण क्षमता बेहतर होनी चाहिए ताकि फसल को आवश्यक पोषक तत्व मिलते रहें। गर्मी और बरसात दोनों ही मौसम में इसकी खेती अच्छी होती है, लेकिन ज्यादा ठंड में उत्पादन कम हो सकता है।
तोरई की खेती करने के लिए सबसे पहले खेत की दो से तीन बार गहरी जुताई करें, जिससे मिट्टी नरम और उपजाऊ हो जाए। खेत की उर्वरक क्षमता बढ़ाने के लिए 10 टन गोबर की खाद या 1 टन वर्मी कम्पोस्ट डालें। खरपतवार कम करने और मिट्टी में नमी बनाए रखने के लिए मल्चिंग विधि अपनाई जा सकती है।
बीजों की मात्रा की बात करें तो एक एकड़ खेत के लिए 600 से 800 ग्राम बीज पर्याप्त होते हैं। पहले नर्सरी तैयार की जाती है, जहां पौधे करीब 1 महीने में तैयार हो जाते हैं, फिर उनकी खेत में रोपाई की जाती है। अगर किसान कम पानी में खेती करना चाहते हैं, तो ड्रिप इरीगेशन पद्धति अपनाकर जल की बचत कर सकते हैं और सरकार से सब्सिडी का लाभ भी उठा सकते हैं।
कीट और रोग नियंत्रण Pest and disease control:
तोरई की अच्छी उपज के लिए समय-समय पर खेत का निरीक्षण करना जरूरी है। अगर फूल गिरने की समस्या आ रही हो, तो मेल और फीमेल फूलों के अनुपात पर ध्यान दें। इसके अलावा, कीटों और बीमारियों से बचाव के लिए सही कीटनाशकों का छिड़काव करें। कृषि विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार जैविक कीटनाशकों का भी प्रयोग किया जा सकता है।
तोरई की उन्नत किस्में:
अगर किसान उन्नत किस्मों का चयन करते हैं, तो उन्हें अधिक उत्पादन और बेहतर कीमत मिल सकती है। तोरई की कुछ बेहतरीन किस्में हैं—पूसा चिकनी, पूसा स्नेहा, पूसा सुप्रिया, पूसा नसदान, कल्याणपुर चिकनी, फुले प्रजातका, घिया तोरई, सरपुतिया, कोयम्बू-2 और काशी दिव्या। सही किस्म के चुनाव से उत्पादन को दोगुना किया जा सकता है।
तोरई की खेती से होने वाली कमाई:
तोरई की खेती से किसानों को शानदार मुनाफा मिल रहा है। कम लागत और उच्च उत्पादन के कारण कई किसान पारंपरिक फसलों की बजाय तोरई की खेती को प्राथमिकता दे रहे हैं।
बागपत के एक किसान ने 12 बीघा जमीन में तोरई की खेती की और 5 लाख रुपये की कमाई की। उन्हें बाजार में ₹40 प्रति किलो का रेट मिला और उनकी फसल इतनी अच्छी थी कि 50% ग्राहक सीधे खेत से आकर खरीदते थे। अगर किसान सही तकनीक अपनाते हैं और समय पर कीट-रोगों का नियंत्रण करते हैं, तो वे तोरई की खेती से लाखों रुपये कमा सकते हैं।
तोरई की खेती क्यों करें?
अगर आप सब्जी की खेती से अच्छी कमाई करना चाहते हैं, तो फरवरी-मार्च में तोरई की खेती करना एक शानदार विकल्प हो सकता है। यह कम समय में अधिक मुनाफा देने वाली फसल है और बाजार में इसकी मांग हमेशा बनी रहती है।
अगर किसान सही तकनीक अपनाएं, सही उन्नत किस्मों का चुनाव करें, और कीट-रोगों का समय पर नियंत्रण करें, तो वे तोरई की खेती से लाखों रुपये कमा सकते हैं। इसलिए, अगर आप भी अपनी आय बढ़ाना चाहते हैं, तो इस बार तोरई की खेती जरूर करें और अच्छा मुनाफा कमाएं!